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#पूर्वोत्तरभारतदर्शन :#दिरांग से #तवांग के बीच #सेला पास ने मोहा मन:

#पूर्वोत्तरभारतदर्शन :#दिरांग से #तवांग के बीच #सेला पास ने मोहा मन:
#नामेरी के रिसोर्ट में रात गुजारने के बाद सुबह शानदार नाश्ता कर हम #दिरांग के लिए अपनी टेंपो ट्रैवलर के ड्राइवर मिस्टर बोरो के साथ नि#रॉयलरिट्रीट में रात गुजारी। पुत्र #आर्यमन का जन्मदिन भी वही मनाया।रात अधिक होने की वजह से होटल वालों ने बड़ी मुश्किल से केक का प्रबंध किया। टैक्सी से केक लाया गया और सबनेजन्म दिन मनाया। प्रातः ब्रेकफास्ट और पास स्थित नदी का नजारा लेते हुए हम तवांग के लिए निकल पड़े। रास्ते में वीर योद्धा जसवंत सिंह स्मारक को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।बताया जाता है कि 1962 के युद्ध में वीर योद्धा जसवंत सिंह ने जसवंतगढ़ पोस्ट पर अकेले सैकड़ों चीनी सैनिकों को ढेर कर कई दिनों तक मोर्चा संभाला था। उनकी याद में भारतीय सेना ने स्मारक व संग्रहालय बनवाया है।
आगे 4114 मीटर /13494 फीट के एटीट्यूड पर सेला पास ने सबका मन मोह लिया। #सेला पास में बर्फ देख 44 डिग्री गर्मी से पहुंचे हमारे चेहरे खिल उठे। वहां का तापमान लगभग 8 डिग्री था। हमें लगेज से गर्म कपडे निकालने पर मजबूर होना पड़ा। कुछ सदस्य बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा सके।पर अन्य लोग फोटो खिंचाने के लिए बर्फ की ओर दौड़ पड़े।सबसे वरिष्ठ सदस्य अतुल जी ने सबसे सटीक स्पॉट चुन लिया था। वास्तव में अद्भुत नजारा था,नीचे बर्फ थी … पानी था… तथा पहाड़ों की चोटिया भी बर्फ से ढकी थी। वास्तव में अरुणाचल प्रदेश अपने आप में खूबसूरती समेटे अलौकिक प्रदेश है। सेला पास की सुंदरता ने थकावट दूर कर दी। है यदि आप को साँस की दिक्कत हो या हार्ट की समस्या हो तो सेला पास में नीचे मत उतारियेगा। शाम को हम बहुप्रतीक्षित तवांग पहुँच गये और विश्राम किया।
#दिरांग अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में एक छोटा सा शहर में स्थित है। यह तवांग के मार्ग पर बोमडिला से 43 किमी की दूरी पर स्थित है। तवांग के मार्ग पर रातोंरात रुकने के लिए यह शहर ज्यादातर पर्यटकों द्वारा उपयोग किया जाता है। असम में जोरघाट और अरुणाचल प्रदेश में तवांग के बीच 320 किमी से अधिक दूरी है।आप दिरांग और बोमडिला दोनों स्थलों में से एक जगह पर रुक सकते है।
#डाराजकुमारसिंह #drrajkumarsinghvaranasi









कल पड़े। 107 किलोमीटर की यात्रा अत्यंत रोमांचक और रोएं खड़े करने वाली थी। रास्ते में कई जगह तो हम समतल जमीन में रहने वालों को भय भी लगा ,परंतु आसपास के नजारे में उस भय को मन में घर नहीं होने दिया। शाम को हम पहुंचे और शानदार बौद्ध वास्तुकला से निर्मित होटल 

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