| मुख्तार और बेगम अफ्शां दोनों लड़ेंगे लोकसभा चुनाव |
| Friday, December 06, 2013 7:39 PM |
| वाराणसी ।अगर मुख्तार खुद बनारस से चुनाव लड़ते हैं तो अफ्शां को घोसी से चुनाव लड़ाया जाएगा। अगर परिस्थितियां इसके विपरित होती है तो चुनाव क्षेत्र ठीक इसी क्रम में पल दिए जाएंगे। कौमी एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने स्पष्ट संकेत दिया कि मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शां का चुनाव लड़ना लगभग तय है। हालांकि दस दिसंबर को पार्टी की होने वाली बैठक में इस निर्णय पर मुहर लगनी बाकी है। जेल में बंद मुख्तार अंसारी का लोकसभा चुनाव लड़ना भी निश्चित है, जो भी संशय है वह लोकसभा क्षेत्रों को लेकर है। वे शुक्रवार को पराड़कर स्मृति भवन में कौमी एकता कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लेने के बाद मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि समय परिस्थिति और जरूरत के मुताबिक समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाने में कोई हर्ज नहीं है। विकल्प खुला है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ता पूरी तरह मुस्तैद हैं। http://www.janwarta.com/detail/mukhtaar-ansari-and-his-wife-aafsa-both-fight-in-parliament-election |
(डॉ राज कुमार सिंह) वाराणसी,7 सितंबर 2018 ।2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौतियों बढ़ती ही जा रही हैं। इन चुनौतियों से कैसे निपटेगी मोदी सरकार।महंगाई, बेरोजगारी, वेतन/पेंशन में संशोधन,मजदूरों किसानों की अपनी-अपनी मांगे तो थी ही एससी एसटी एक्ट में संशोधन कर भाजपा ने अपने मूल वोटरों व समर्थकों को भी छेड़ दिया है।बिना किसी नेतृत्व के सवर्णों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू कर अपने तेवर दिखा दिए। विपक्षियों ने सरकार की इन मुद्दों पर घेराबंदी तेज़ कर दिया है। सवर्णों के कल भारत बंद की सफलता तथा महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा 10 सितम्बर को घोषित भारत बंद जनता के गुस्से को जरूर बढ़ाएगा। आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के नुमाइंदों का जनता ने विरोध शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि निरुत्तर नेता भीड़ में जाने से बच रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ऊपर तो जूते तक उछाले गए हैं। मोदी सरकार के विरुद्ध जो प्रमुख मुद्दे जो मुद्दे चुनौती बन गए है उनमें प्रमुख ये है- 1-एससी/एसटी एक्ट के विरुद्ध सवर्णों व पिछड़ों का विरोध । ...
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