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Showing posts from 2018

इन 13 चुनौतियों से क्या निपट पाएगी मोदी सरकार?

(डॉ राज कुमार सिंह) वाराणसी,7 सितंबर 2018 ।2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौतियों बढ़ती ही जा रही हैं। इन चुनौतियों से कैसे निपटेगी मोदी सरकार।महंगाई, बेरोजगारी, वेतन/पेंशन में संशोधन,मजदूरों किसानों की अपनी-अपनी मांगे तो थी ही एससी एसटी एक्ट में संशोधन कर भाजपा ने अपने मूल वोटरों व समर्थकों को भी छेड़ दिया है।बिना किसी नेतृत्व के सवर्णों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू कर अपने तेवर दिखा दिए। विपक्षियों ने सरकार की इन मुद्दों पर घेराबंदी तेज़ कर दिया है। सवर्णों के कल भारत बंद की सफलता तथा महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा 10 सितम्बर को घोषित भारत बंद जनता के गुस्से को जरूर बढ़ाएगा। आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के नुमाइंदों का जनता ने विरोध शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि निरुत्तर नेता भीड़ में जाने से बच रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ऊपर तो जूते तक उछाले गए हैं। मोदी सरकार के विरुद्ध जो प्रमुख मुद्दे जो  मुद्दे चुनौती बन गए है उनमें प्रमुख ये है- 1-एससी/एसटी एक्ट के विरुद्ध सवर्णों व पिछड़ों का विरोध । ...

आइये,वाराणसी को पॉलिथीन मुक्त बनाएँ, अभी लें शपथ

क्या आप जानते है? आप जानते है पॉलिथीन आज मानव जाति के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा क्षमता को खत्म कर रहा है और भूजल स्तर को घटा रहा है। इसका प्रयोग सांस और त्वचा संबंधी रोगों के साथ ही कैंसर का खतरा भी बढ़ा रहा है। यह गर्भस्थ शिशु के विकास को भी रोक सकता है। पॉलिथीन को जलाने से निकले वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहा है जो ग्लोबल वार्मिग का बड़ा कारण है। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है और प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है। ''पॉलिथीन का कचरा जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सींस जैसी विषैली गैस उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। ''पॉलिथीन सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण है। यह नालियों से होता हुआ सीवर में जाकर जमा हो जाता है। इससे गंदे पानी का बहाव बाधित होता है। हमे वाराणसी को पॉलिथीन मुक्त करना है।वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित...

#पूर्वोत्तरभारतदर्शन :#दिरांग से #तवांग के बीच #सेला पास ने मोहा मन:

# पूर्वोत्तरभारतदर्शन   : # दिरांग   से   # तवांग   के बीच   # सेला   पास ने मोहा मन: # नामेरी  के रिसोर्ट में रात गुजारने के बाद सुबह शानदार नाश्ता कर हम #दिरांग के लिए अपनी टेंपो ट्रैवलर के ड्राइवर मिस्टर बोरो के साथ नि # रॉयलरिट्रीट  म ें रात गुजारी। पुत्र  # आर्यमन  का जन्मदिन भी वही मनाया।रात अधिक होने की वजह से होटल वालों ने बड़ी मुश्किल से केक का प्रबंध किया। टैक्सी से केक लाया गया और सबनेजन्म दिन मनाया। प्रातः ब्रेकफास्ट और पास स्थित नदी का नजारा लेते हुए हम तवांग के लिए निकल पड़े। रास्ते में वीर योद्धा जसवंत सिंह स्मारक को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।बताया जाता है कि 1962 के युद्ध में वीर योद्धा जसवंत सिंह ने जसवंतगढ़ पोस्ट पर अकेले सैकड़ों चीनी सैनिकों को ढेर कर कई दिनों तक मोर्चा संभाला था। उनकी याद में भारतीय सेना ने स्मारक व संग्रहालय बनवाया है। आगे 4114 मीटर /13494 फीट के एटीट्यूड पर सेला पास ने सबका मन मोह लिया। #सेला पास में बर्फ देख 44 डिग्री गर्मी से पहुंचे हमारे चेहरे खिल उठे। वहां का तापमान लगभग 8 ...

तवांग_धरती_का_छुपा _स्वर्ग

#तवांग_धरती_का_छुपा _स्वर्ग   #tawang#hidden#heaven#of#earth पूर्वोत्तर भारत की यात्रा के क्रम में हम अपनी मंजिल के अत्यंत करीब पहुंचने से पूर्व ही सुंदर नजारों से आनंदित हो गये थे। #तवांग जिसे धरती का #गुप्त_स्वर्ग (#Hidden_Heaven) भी कहा जा सकता है, वास्तव में स्वर्ग ही है। हम अनेक स्थानों पर गये हैं तथा बर्फ को भी देखा है,परंतु यहां का खूबसूरत नजारा तथा बर्फ की चादरों से ढकी सुन्दर पहाड़ों की चोटियां कभी सुनहरी तो कभी चांदी सी चमकत- मनमोहक स्वरुप दर्शा रही थीं। लंबी यात्रा से हम थोड़े थके तो थे लेकिन बेहतरीन नजारों ने थकावट दूर कर दिया। रास्ते के मनमोहक दृश्य सभी ने अपनी आंखों से दिल में उतारा तथा आधुनिक तीसरी आंख (कैमरों) में कैद किया ताकि सदा याद रहे।वास्तव में मन को मोहने वाले नज़ारे थे।#तवांग पहुंचकर हम लोगों ने होटल में चेकिंग किया और भोजन कर विश्राम करने यह सोच कर चले गये कि अभी ट्रेलर ऐसा है तो फिल्म कैसी होगी।अगली प्यारी सुबह सभी स्वर्ग का दर्शन करने #बुमला_पास,#माधुरी_लेक को प्रस्थान कर गए। मैंने स्वर्ग तो नहीं देखा है पर शायद जो कल्पना की है या फिल्मों तथा अन्य...

चीख रहे हैं काशी के देवी देवता, बचा लो- बचा लो...

काशी तो गलियों और मंदिरों का शहर है ।हर गली में देवता-देवी परिवार सहित वास करते है।काशीवासी अपने देवताओं की सेवा में जीवन अर्पित कर देते हैं।पीढ़ियों से ऐसा चला आ रहा है।ये वो शहर है जहाँ धन्ना सेठ और गरीब एक ही दुकान पर खड़े होकर कचौड़ी जलेबी खाते हैं।कोई वीआईपी नही,कोई भेद भाव नही।कहा जाता है की जिसे जो चाहिए शाम होते होते मिल जाता है।कोई भूखा नही सोता। काशी वासियों को उनकी गालियां और मंदिर ही प्यारे है।सब अपने मे मस्त रहते हैं ।बाबा की सबपर विशेष कृपा है। दुनिया के सबसे पुराने जीवंत नगर को सहेजने के स्थान पर तोड़ना कहाँ तक उचित है। काशी के देवी-देवता गलियां चीख रही हैं,अपना अस्तित्व बचाने के लिए तड़प रही हैं। #मंदिर,#धरोहर क्यों तोड़े जा रहे हैं? काशी नगरी को विश्व धरोहर घोषित कराने की दिशा में पहल होनी चाहिये। न की प्राचीनतम शहर को उजाड़ने को हथौड़े और बुलडोजर का प्रबंध। #सरकार, कुछ करना है,दिखाना है,करने की कूबत है तो... नई काशी बना दीजिये गंगा मैया को बचा लीजिये और दुनिया को दिखाइए कितना सुंदर बनाया। फिर तुलना करिये... बाबा श्री भोलेनाथ की बसाई प्राचीन काशी से और अपने नय...