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आइये,वाराणसी को पॉलिथीन मुक्त बनाएँ, अभी लें शपथ



क्या आप जानते है?
आप जानते है पॉलिथीन आज मानव जाति के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा क्षमता को खत्म कर रहा है और भूजल स्तर को घटा रहा है।
इसका प्रयोग सांस और त्वचा संबंधी रोगों के साथ ही कैंसर का खतरा भी बढ़ा रहा है। यह गर्भस्थ शिशु के विकास को भी रोक सकता है। पॉलिथीन को जलाने से निकले वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहा है जो ग्लोबल वार्मिग का बड़ा कारण है। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है और प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है।
''पॉलिथीन का कचरा जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सींस जैसी विषैली गैस उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।
''पॉलिथीन सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण है। यह नालियों से होता हुआ सीवर में जाकर जमा हो जाता है। इससे गंदे पानी का बहाव बाधित होता है।
हमे वाराणसी को पॉलिथीन मुक्त करना है।वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित बनाना है।
आज एक सराहनीय पहल हुई-
वाराणसी विकास समन्वय समिति की पहल पर 15 अगस्त 2018 तक पालिथीन मुक्त काशी के लिए उपस्थित प्रबुद्धजनों व्यापारियों,उपभोक्ताओं और समाजसेवियों ने हाथ उठाकर शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया “हम सभी शपथ लेते हैं कि जानलेवा प्लास्टिक जो कि वायुमण्डल को प्रदूषित करता है,स्वच्छता को प्रभावित करता है,जिससे   जन -जीवन प्रभावित होता है। ऐसे पॉलिथीन को न खरीदेंगे, न बेचेंगे, और ही न निर्माण करेंगे,ताकि इससे पड़ने वाले प्रतिकूल दुस्परिणामो को रोका जा सके। इसको रोकने के लिए जन.जागरण अभियान में हम पूर्ण सहयोग करेंगें
सभी को यह शपथ समिति के संरक्षक दैनिक जागरण के निदेशक वीरेंदर कुमार गुप्त ने दिलायी। उन्होंने कहा कि पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक सभी के हित में है। सुनहरे भविष्य के लिए सभी सहयोग करें।
    आज दोपहर वाराणसी विकास समिति के मलदहिया विनायक प्लाजा स्थित मुख्यालय में आहूत समन्वय समिति बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन मण्डलायुक्त दीपक अग्रवाल ने की। इस मौके पर उन्होंने 15 अगस्त 2018 तक काशी को पॉलीथिन मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए काशी वासियो से सहयोग की अपील की। मंडलायुक्त ने कहा कि यह तभी सम्भव है, जब हम किसी भी वस्तु को खरीदने के लिए निकले तो पॉलिथीन का सहारा छोड़कर झोला लेकर घर से निकलें। उन्होंने बताया कि जन-जागरण के माध्यम से इसे रोकने की चेष्टा की जा रही है।  इसके लिए शीघ्र टास्क फोर्स का गठन होगा,जिसकी पाक्षिक समीक्षा होगी। पॉलिथीन के प्रयोग का नुकसान तुरन्त नहीं दिखता पर यह जानलेवा होता है। इससे सीवर चोक हो जाता है, सड़के ख़राब हो जाती है,पशुओं की मौत हो जाती है, मनुष्यो का स्वास्थ्य ख़राब हो जाता है। इससे सभी को नुकसान है। पॉलिथीन के व्यापारी बन्धु इस समस्या का हल विकल्प से निकालें,जीवन में प्राथमिकता तय करें।
प्रारम्भ में वाराणसी विकास समिति के अध्यक्ष आर के चौधरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि जीवन में खुशहाली के लिए पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक जरुरी है।     
   वाराणसी विकास समिति के संरक्षक व अमर उजाला के सम्पादक राजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि प्राण घातक पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक के लिए दण्डा शक्ति से  ज्यादा इच्छा शक्ति की जरूरत है। कई राज्यों में जब इस पर रोक लग सकती है तो बनारस में क्यों नहीं। चरणबद्ध तरीके से पॉलिथीन का प्रयोग रोके। धर्माधिकारियों का सहयोग लें। श्री त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि एक दूसरे को कोई भी उपहार झोले में दें। जो लोग चाहे उपहार में झोला भी दे सकते हैं। वाराणसी विकास समिति के संरक्षक व हिंदुस्तान के सम्पादक योगेश राणा ने सुझाव दिया कि मुहल्लों में स्थान-स्थान पर जन-जागरण के माध्यम से प्रतियोगिता कराकर नुक्क्ड़ नाटकों के माध्यम से डुगडुगिया ;नगाड़ा, पिटवाकर, चन्दुवा सट्टी सहित उन सभी बड़े स्थानों पर जहाँ पॉलिथीन का अधिकतम प्रयोग होता है। लोगो को प्रेरित कर इसपर हमेशा के लिए रोक लगनी चाहिए इसके बाद भी जो लोग न माने तो खरीदने व बेचने वालो के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही की जाय।
समिति के संरक्षक व राष्ट्रीय सहारा के सम्पादक स्नेह रंजन ने बताया कि वाराणसी मे चाईना का पॉलिथीन बिकता है,जबकि स्वयं चाईना पॉलिथीन का प्रयोग नहीं करता। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में पॉलिथीन का प्रयोग नहीं होता है। पॉलिथीन में चाय व अन्य खाद्यान्न की आपूर्ति की जाती है,जो आगे चलकर मनुष्य के लिए कैंसर सामान हो जाती है। इसका जीवन के हर क्षेत्र में उपयोग हो रहा है,इसे थैला व अखबारी व बांस के कागज के ठोंगे से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि आईएमए को स्वतः संज्ञान लेकर सभी दवा विक्रेताओ को निर्देशित कर देना चाहिए कि वे पॉलिथीन की जगह कागज के ठोंगे में दवा बेचें।
     समिति के संरक्षक व दैनिक जागरण के समाचार सम्पादक प्रदीप शुक्ला ने कहा कि पॉलिथीन जीवों का दुश्मन है, इसका प्रयोग बंद करने के लिए सभी को आगे आना चाहिए,इसकी शुरुवात स्वयं से करनी चाहिए। हमें मुरादाबादए इन्दौर आदि जिलों से सीख लेनी चाहिए। सभी लोग झोले व कागज के ठोंगे का प्रयोग करें। व्यापार तब भी होता था और आगें भी होगा।
समिति के संरक्षक व जनवार्ता के सम्पादक डा.राजकुमार सिंह ने सुझाव दिया कि कम से कम लागत में झोला दुकानदारों को उपलब्ध कराया जाय। व्यापार के लिए पॉलिथीन का झोला ही जरुरी नहीं है। एफएम चैनल के हेड नरेंद्र सिंह ने उपभोक्ताओं को जागरूक करने,पर्यटक स्थलों को नो प्लास्टिक जोन घोषित करने,विद्यार्थियों को जागरूक करने सहित अनेक सुझाव दिए।
     महानगर उद्योग व्यापार समिति के अध्यक्ष प्रेम मिश्रा ने बताया कि लहुराबीर,हथुवा मार्केट,सप्त सागर दवा मण्डी, बांसफाटक,गोदौलिया व दशाश्वमेध क्षेत्र में व्यापारियों ने पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक लगा दिया है। इस क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रो में भी पॉलिथीन प्रयोग न करने के लिए लोगो को जागरूक किया जा रहा है।
     टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने जन-जागरण अभियान को गति देने के लिए प्रथम चरण में पाँच सौ थैले देने की बात कही। प्लास्टिक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रबोध मेहरा ने व्यापारिक हितों का ध्यान रखते हुए ऐसे प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक की वकालत की जिसकी रिसाइकिलिंग न हो सके और 50 माइक्रोन के नीचे हो।
इस अवसर पर वाराणसी विकास समिति के उपाध्यक्ष रोटरी क्लब के वाराणसी सेन्ट्रल के अध्यक्ष आर सी जैन समिति के कोषाध्यक्ष श्रीनारायण खेमका ने दुकानदारों को विकल्प देकर व अन्य सामाजिक संस्थाओ का सहयोग लेने का सुझाव दिया।
     इस अवसर पर सर्वश्री यू० आर० सिंह ,महेश चैधरी सहित कई लोगो ने अपने सुझाव दिए। बैठक का संचालन समिति के समन्वयक राजेंद्र कुमार दूबे तथा आभार प्रकाश वरिष्ठ पत्रकार अरुण मिश्रा ने किया। बैठक में बड़ी संख्या में प्लास्टिक एसोसिएशन जुड़े लोग उपस्थित थे।

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