आज लग रहा है अपने बनारस में हूँ ।
डेढ़ महीने तक तो देश भर के स्वयं घोषित ज्ञानियों ,ऋषियों,संतों,नेताओं,मीडिया कर्मियों की आयातित फ़ौज ने खूब ज्ञान बाटा और अपना ज्ञान बढाया भी।शहर के होटल लाज से लेकर घर तक मतलब से आए लोगों से भरा था।अपने बनारस के लोग अजूबों के साथ या तो खो गए थे या खातिरदारी में लग गए थे। आज खाली हुए है गली मोहल्ले और चौराहे पर दिख रहे है। अपने पन का अहसास हो रहा है।अनिष्ठ,अफवाह की ख़बरों के इतर मन शांत है। आज बनारस का रस वापस लौट आया है।क्यों।₹₹₹हर हर महादेव₹₹₹
(डॉ राज कुमार सिंह) वाराणसी,7 सितंबर 2018 ।2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौतियों बढ़ती ही जा रही हैं। इन चुनौतियों से कैसे निपटेगी मोदी सरकार।महंगाई, बेरोजगारी, वेतन/पेंशन में संशोधन,मजदूरों किसानों की अपनी-अपनी मांगे तो थी ही एससी एसटी एक्ट में संशोधन कर भाजपा ने अपने मूल वोटरों व समर्थकों को भी छेड़ दिया है।बिना किसी नेतृत्व के सवर्णों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू कर अपने तेवर दिखा दिए। विपक्षियों ने सरकार की इन मुद्दों पर घेराबंदी तेज़ कर दिया है। सवर्णों के कल भारत बंद की सफलता तथा महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा 10 सितम्बर को घोषित भारत बंद जनता के गुस्से को जरूर बढ़ाएगा। आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के नुमाइंदों का जनता ने विरोध शुरू कर दिया है। स्थिति यह है कि निरुत्तर नेता भीड़ में जाने से बच रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ऊपर तो जूते तक उछाले गए हैं। मोदी सरकार के विरुद्ध जो प्रमुख मुद्दे जो मुद्दे चुनौती बन गए है उनमें प्रमुख ये है- 1-एससी/एसटी एक्ट के विरुद्ध सवर्णों व पिछड़ों का विरोध । ...
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