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पूर्वांचल की राजनीति में हावी माफिया

पूर्वांचल की राजनीति में हावी माफिया
भ्रस्टाचार के साथ साथ राजनीति के अपराधिकरण को रोकना अत्यंत अवश्यक है .
पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों पर नजर डालें तो परोक्ष-अपरोक्ष रूप से हर जिले पर किसी न किसी माफिया का कब्जा है. जौनपुर के सांसद धनंजय सिंह, जेल में बंद माफिया मुन्ना बजरंगी, आजमगढ़ के सांसद रमाकांत यादव और उमाकांत यादव, वाराणसी-चंदौली में ब्रजेश सिंह उनके भतीजे सुशील सिंह ,चंदौली- मिर्जापुर में विनीत सिंह , भदोही में विजय मिश्र,उदयभान सिंह , गाजीपुर और मऊ में मुख्तार अंसारी, बलिया में भोला पांडेय और पप्पू सिंह, गोरखपुर में हरिशंकर तिवारी, गोंडा में ब्रजभूषण सिंह, रायबरेली में संजय सिंह, अशोक सिंह, फैजाबाद में राकेश पाण्डेय व पवन पाण्डेय और इलाहाबाद में अतीक अहमद का प्रभाव है.इन सभी को भारी जन समर्थन प्राप्त है.पूर्वांचल राज्य बना तो यह तो तय है की इनमे से ज्यादातर मंत्री या कह सकते है मुख्यमंत्री भी बन सकते है .
सभी जानते है की देश की राजनीति में पूर्वांचल ने कितने नेता दिए है .यह भी जानते है की राजनीति में अपराधिकरण के बाद ही ज्यादा भ्रस्टाचार बढ़ा है.इसलिए भ्रस्टाचार के साथ अपराधिकरण से भी राजनीत को मुक्त करना अत्यंत अवश्यक है.इस पुनीत कार्य को करने के लिए विधानसभा चुनाव से बेहतर समय नहीं मिलेगा.जरा सोचिए ?

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