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समाजसुधारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 

जमीन से उठकर गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सफल प्रशासक और राजनेता की पहचान बना चुके नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनाने के बाद नयी भूमिका में भी नजर आने लगे है। ये नयी भूमिका समाज सुधारक की है। उन्होंने देश को स्वच्छ करने के लिए बड़ा अभियान चलाया है।  यदि हम बात करे तो देश की मंत्रीपरिषद में सर्वोच्च पद पर बैठा कोई भी व्यक्ति अभी तक समाज सुधारक के रूप में नजर नहीं आया है। पूर्व के तमाम प्रधानमंत्री सख्त प्रशासक के रूप में ही कार्य करते रहे। दूसरी और समाज को सुधारने के लिये  जीवन भर कार्य करने वाले महा पुरुष कभी सर्वोच्च या प्रमुख पद पर नहीं बैठे थे। अपनी वाणी और जादुई व्यक्तित्व क्षमता की बदौलत पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल मोदी जनता को उसी की भाषा में समझाने की कला जानते है। वे भारत के ब्राण्ड अम्बेसडर बन चुके है।  यह अलग है कि देश में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी रहे हो या तत्कालीन भारतीय समाज की कट्टरता, रूढ़िवादिता एवं अंध विश्वासों को दूर करके उसे आधुनिक बनाने का प्रयास करने वाले राजा राम मोहन राय,आधुनिक भारत के महान चिन्तक स्वामी दयानन्द सरस्वती हों या बाल विवाह के विरोधी बाल गंगाधर तिलक ,भेदभाव, छूआछूत, जातपात एवं अंध विश्वास के निडर विरोधी संत कबीर रहे हो या भूदान आंदोलन की शुरूआत करने वाले विनोबा भावे किसी आंदोलन सफलता के शीर्ष तक नहीं पहुंच सका। समाज में विसंगतियां आज भी ज्यों की त्यों हैं। यह अलग बात है की इन तमाम बड़े बड़े समाजसुधारकों में सर्वोच्च प्रधानमंत्री के पद तक कोई नहीं पहुंच सका था परन्तु  प्रचार के आधुनिक माध्यमों की गैरमौजूदगी में भी समाज में इन महापुरुषों का व्यापक प्रभाव था । 
प्रधानमंत्री ने समाजसुधार के लिए आधुनिक प्रभाव तकनीकों मीडिया से सोशल मीडिया को अस्त्र बनाया है। इन नवीन तकनीकों के वे विशेषज्ञ भी मने जाते है। सफाई ,वर्षा जल संचयन ,शौचालय निर्माण ,जातिवाद का ख़ात्मा ,कन्या भ्रूण हत्या समाप्त करना ,बुजुर्गों के  सम्मान को लेकर उन्होंने अभियान छेड़ रखा  है। वाराणसी के जयापुर गांव में भी प्रधानमंत्री मोदी का यही रूप दिखा । ऐसा लगता है कि समाज निर्माण  के कार्य में अपने अच्छे प्रशासक की छवि का वे अवश्य उपयोग करेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में समाज की विसंगतियों को दूर करने के लिए कड़े कानून बनाने में भी वे सक्षम है और ऐसे कानून समय की मांग भी।  मोदी जानते है की साक्षरता के साथ कड़े कानून की भी आवश्यकता है ।
राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार, मंत्रिपरिषद का मुखिया, तथा लोकसभा में बहुमत वाले दल का नेता होता है। वह भारत सरकार के कार्यपालिका का नेतृत्व करता है।प्रधानमंत्री को भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण राजनैतिक व्यक्तित्व माना जाता है। वे कड़े कानून भी बना सकता है । प्रशासक और राजनेता के रूप में सफल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समाज सुधारक की नयी भूमिका में कितना सफल होंगे यह तो तारीख तय करेगी पर यदि वे इस अभियान में सफल हो गए तो विश्वगुरु बनाने का भारत का स्वप्न अवश्य पूर्ण होगा । यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि भी होगी । 

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