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रेलवे के खाने से शिकायत है तो तुरंत फ़ोन करें


रेलवे के खाने से शिकायत है तो तुरंत फ़ोन करें

भारतीय रेल में सफ़र करने वाले यात्रियों को अक़सर ट्रेन में दिए जाने वाले भोजन को लेकर शिकायत रहती है. समय-समय पर खाने की गुणवत्ता और साफ़-सफ़ाई के बारे में भी सवाल उठे हैं.

इन्हीं शिक़ायतों से निपटने के लिए अब भारतीय रेल ने एक फोन सेवा शुरू की है.

भोजन-संबंधी शिक़ायत दर्ज करने के लिए यात्री को 1800111321 पर डायल करना होगा जो कि एक टोलफ्री नंबर है. यानी इस नंबर पर फ़ोन करने का कोई पैसा नहीं देना होगा.

ये मुफ़्त फ़ोन सेवा पूरे सप्ताह सुबह सात बजे से रात के दस बजे तक उपलब्ध रहेगी.

डायल करें टोल फ्री नंबर

ट्रेनों और स्टेशनों पर केटरिंग सेवा के खिलाफ़ बढ़ती शिक़ायतों से चिंतित रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने बुधवार को कई कदमों की घोषणा की जिनमें यात्रियों के लिए भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक मुफ़्त फोन नंबर भी शामिल है.

पवन बंसल का कहना था, "कोई भी मुफ़्त नंबर पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है और उसकी सुनवाई होगी. ये शिक़ायत ज़्यादा दाम से लेकर कम या ख़राब भोजन के बारे में हो सकती है और इस पर जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी."

ये नंबर 18 जनवरी से लागू हुआ है और अब तक 26 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं.

रेल मंत्री ने रेल यात्रा के दौरान परोसे जाने वाले दही पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ट्रेन में परोसा जाने वाला दही अच्छा नहीं होता और मंत्रालय इस बात की पुष्टि करेगा कि दही अच्छे ब्रांड से खरीदा जाए.

केंद्रीय मंत्री ने ‘मेन्यू कार्ड’ में भी सुधार की बात की है.

साल 2009-2010 में रेलवे को खानपान में 75 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा जबकि साल 2010-2011 में 54 करोड़ रुपये का घाटा रेलवे को उठाना पड़ा.

'अच्छा हो खाना'

पवन बंसल ने ये भी साफ किया कि उनका मकसद कैटरिंग से कमाई का नहीं है लेकिन वो ये चाहते हैं कि जो खाना परोसा जाए वो साफ-सुथरा और स्वास्थ्यवर्धक हो.

रेलवे हर रोज पाँच लाख 22 हजार लोगों को खाना परोसती है जबकि रेलवे के खानपान का कारोबार प्रतिवर्ष 22 हजार करोड़ का है.

रेलवे में खान पान की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने देश भर में 250 आधुनिक रसोई घर बनाने का फैसला लिया है.

इसके लिए रेलवे ने सस्ती दरों पर ज़मीन मुहैया कराने का फैसला भी किया है.

सरकार ने रेलवे की खानपान सेवा को नए सिरे से लागू करने की बात कही है. हालांकि, नई नीति 2010 में ही आ गई थी लेकिन लागू अभी तक नहीं हो पाई है.

मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि इस साल अप्रैल तक कैटरिंग की व्यवस्था किसी और संस्था को सौंप देने की दिशा में बातचीत अंतिम पायदान पर है.

रेलवे की नई नीति के तहत खानपान की ठेकेदारी देने में भी सावधानी बरती जाएगी और एक ठेकेदार

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